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वाल्मीकि रामायण 96.35

द्विजाश्च नेदुर्घोराश्च सञ्चचालेव मेदिनी।
ववर्ष रुधिरं देवश्चस्खलुस्तुरगाः पथि ।। ६.९६.३५ ।।

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