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वाल्मीकि रामायण 96.15

आकोशपद्मवक्त्राणि पद्मकेसरवर्चसाम्।
अद्य यूथतटाकानि गजवत् प्रमथाम्यहम् ।। ६.९६.१५ ।।

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