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वाल्मीकि रामायण 96.14

अद्य वानरसैन्यानि रथेन पवनौजसा।
धनुःसमुद्रादुद्भूतैर्मथिष्यामि शरोर्मिभिः ।। ६.९६.१४ ।।

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