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वाल्मीकि रामायण 95.34

प्रसन्नस्तु महादेवो देवानेतद्वचो ऽब्रवीत्।
उत्पत्स्यति हितार्थं वो नारी रक्षःक्षयावहा ।। ६.९५.३५ ।।

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