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वाल्मीकि रामायण 91.72

धर्मात्मा सत्यसन्धश्च रामो दाशरथिर्यदि।
पौरुषे चाप्रतिद्वन्द्वः शरैनं जहि रावणिम् ।। ६.९१.७२ ।।

पूरा अध्याय