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वाल्मीकि रामायण 91.51

तौ भासयन्तावाकाशं धनुर्भ्यां विशिखौ च्युतौ।
मुखेन मुखमाहत्य सन्निपेततुरोजसा ।। ६.९१.५१ ।।

पूरा अध्याय