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वाल्मीकि रामायण 91.50

ताभ्यां तौ धनुषि श्रेष्ठे संहितौ सायकोत्तमौ।
विकृष्यमाणौ वीराभ्यां भृशं जज्वलतुः श्रिया ।। ६.९१.५० ।।

पूरा अध्याय