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वाल्मीकि रामायण 9.11

समुद्रम् लन्घयित्वा तु घोरम् नद नदी पतिम् ।
कृतम् हनुमता कर्म दुष्करम् तर्कयेत कः ॥६-९-११॥

पूरा अध्याय