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वाल्मीकि रामायण 9.10

अप्रमत्तम् कथम् तम् तु विजिगीषुम् बले स्थितम् ।
जित रोषम् दुराधर्षम् प्रधर्षयितुम् इच्चथ ॥६-९-१०॥

पूरा अध्याय