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वाल्मीकि रामायण 86.5

जहि वीर दुरात्मानं मायापरमधार्मिकम्।
रावणिं क्रूरकर्माणं सर्वलोकभयावहम् ।। ६.८६.५ ।।

पूरा अध्याय