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वाल्मीकि रामायण 85.34

स तं प्राप्य धनुष्पाणिर्मायायोगमरिन्दमः।
तस्थौ ब्रह्मविधानेन विजेतुं रघुनन्दनः ।। ६.८५.३४ ।।

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