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वाल्मीकि रामायण 78.4

रावणस्य वचः श्रुत्वा शूरमानी खरात्मजः।
बाढमित्यब्रवीद्धृष्टो मकाराक्षो निशाचरः ।। ६.७८.४ ।।

पूरा अध्याय