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वाल्मीकि रामायण 76.41

सहसा ऽभिहतस्तेन विप्रमुक्तपदः स्फुरन्।
निपपाताद्रिकूटाभो विह्वलः प्लवगोत्तमः ।। ६.७६.४१ ।।

पूरा अध्याय