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वाल्मीकि रामायण 75.61

तत्रोन्मत्ता इवोत्पेतुर्हरयो ऽथ युयुत्सवः।
तरुशैलैरभिघ्नन्तो मुष्टिभिश्च निशाचरान् ।। ६.७५.६१ ।।

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