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वाल्मीकि रामायण 74.59

स तं समासाद्य महानगेन्द्रमतिप्रवृद्धोत्तमघोरशृङ्गम्।
ददर्श पुण्यानि महाश्रमाणि सुरर्षिसङ्घोत्तमसेवितानि ।। ६.७४.५८ ।।

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