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वाल्मीकि रामायण 73.61

स वै गदाभिर्हरियूथमुख्यान् निर्भिद्य बाणैस्तपनीयपुङ्खैः।
ववर्ष रामं शरवृष्टिजालैः सलक्ष्मणं भास्कररश्मिकल्पैः ।। ६.७३.६१ ।।

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