ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7373.17वाल्मीकि रामायण 73.17ततस्तु हुतभोक्तारं हुतभुक्सदृशप्रभः। जुहाव राक्षसश्रेष्ठो मन्त्रवद्विधिवत्तदा ।। ६.७३.१७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय