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वाल्मीकि रामायण 71.14

कालजिह्वाप्रकाशाभिर्य एषो ऽतिविराजते।
आवृतो रथशक्तीभिर्विद्युद्भिरिव तोयदः ।। ६.७१.१४ ।।

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