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वाल्मीकि रामायण 70.53

तेजसा सम्प्रदीप्ताग्रां रक्तमाल्याविभूषिताम्।
ऐरावतमहापद्मसार्वभौमभयावहाम् ।। ६.७०.५३ ।।

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