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वाल्मीकि रामायण 70.52

हेमपट्टपरिक्षिप्तां मांसशोणितफेनिलाम्।
विराजमानां वपुषा शत्रुशोणितरञ्जिताम् ।। ६.७०.५२ ।।

पूरा अध्याय