वाल्मीकि रामायण 69.95
नरान्तकः क्रोधवशं जगाम हतं तुरङ्गं पतितं निरीक्ष्य।
स मुष्टिमुद्यम्य महाप्रभावो जघान शीर्षे युधि वालिपुत्रम् ।। ६.६९.९५ ।।
नरान्तकः क्रोधवशं जगाम हतं तुरङ्गं पतितं निरीक्ष्य।
स मुष्टिमुद्यम्य महाप्रभावो जघान शीर्षे युधि वालिपुत्रम् ।। ६.६९.९५ ।।