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वाल्मीकि रामायण 66.3

तमवध्यं मधवता यमेन वरुणेन वा।
प्रेक्ष्य भीमाक्षमायान्तं वानरा विप्रदुद्रुवुः ।। ६.६६.३ ।।

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