ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 6666.2वाल्मीकि रामायण 66.2स ननाद महानादं समुद्रमभिनादयन्। जनयन्निव निर्घातान् विधमन्निव पर्वतान् ।। ६.६६.२ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय