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वाल्मीकि रामायण 62.4

स तत्तदा सूर्य इवाभ्रजालं प्रविश्य रक्षोधिपतेर्निवेशम् ।
ददर्श दूरे ऽग्रजमासनस्थं स्वयम्भुवं शक्र इवासनस्थम् ।। ६.६२.४ ।।

पूरा अध्याय