ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 6161.21वाल्मीकि रामायण 61.21एवं प्रजा यदि त्वेष भक्षयिष्यति नित्यशः । अचिरेणैव कालेन शून्यो लोको भविष्यति ।। ६.६१.२१ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय