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वाल्मीकि रामायण 61.15

स कुम्भकर्णं कुपितो महेन्द्रो जघान वज्रेण शितेन वज्री ।
स शक्रवज्राभिहतो महात्मा चचाल कोपाच्च भृशं ननाद ।। ६.६१.१५ ॥

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