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वाल्मीकि रामायण 59.91

विसञ्ज्ञं वानरं दृष्ट्वा दशग्रीवो रणोत्सुकः ।
रथेनाम्बुदनादेन सौमित्रिमभिदुद्रुवे ।। ६.५९.९२ ।।।।

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