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वाल्मीकि रामायण 59.77

स तान् वृक्षान् समासाद्य प्रतिचिच्छेद रावणः ।
अभ्यवर्षत् सुघोरेण शरवर्षेण पावकिम् ।। ६.५९.७८ ।।।।

पूरा अध्याय