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वाल्मीकि रामायण 59.71

स शरौघसमायस्तो नीलः कपिचमूपतिः ।
करेणैकेन शेलाग्रं रक्षोधिपतये ऽसृजत् ।। ६.५९.७२ ।।।।

पूरा अध्याय