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वाल्मीकि रामायण 59.47

काममार्यः सुपर्याप्तो वधायास्य दुरात्मनः ।
विधमिष्याम्यहं नीचमनुजानीहि मां प्रभो ।। ६.५९.४७ ।।।।

पूरा अध्याय