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वाल्मीकि रामायण 59.25

असौ किरीटी चलुकुण्डलास्यो नगेन्द्रविन्ध्योपमभीमकायः ।
महेन्द्रवैवस्वतदर्पहन्ता रक्षोधिपः सूर्य इवावभाति ।। ६.५९.२५ ।।।।

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