ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 5959.113वाल्मीकि रामायण 59.113अथ वायुसुतः क्रुद्धो रावणं समभिद्रवत् । आजघानोरसि क्रुद्धो वज्रकल्पेन मुष्टिना ।। ६.५९.११४ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय