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वाल्मीकि रामायण 59.103

स तान् प्रचिच्छेद हि राक्षसेन्द्रश्छित्त्वा च ताँल्लक्ष्मणमाजघान ।
शरेण कालाग्निसमप्रभेण स्वयम्भुदत्तेन ललाटदेशे ।। ६.५९.१०४ ।।।।

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