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वाल्मीकि रामायण 57.26

हयैर्महाजवैर्युक्तं सम्यक् सूतसुसंयतम् ।
महाजलदनिर्घोषं साक्षाच्चन्द्रार्कभास्वरम् ।। ६.५७.२६ ।।।।

पूरा अध्याय