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वाल्मीकि रामायण 57.12

रावणेनैवमुक्तस्तु प्रहस्तो वाहिनीपतिः ।
राक्षसेन्द्रमुवाचेदमसुरेन्द्रमिवोशना ।। ६.५७.१२ ।।।।

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