Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 57.11

आपत् संशयिता श्रेयो न तु निस्संशयीकृता ।
प्रतिलोमानुलोमं वा यद्वा नो मन्यसे हितम् ।। ६.५७.११ ।।।।

पूरा अध्याय