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वाल्मीकि रामायण 56.11

अकम्पनस्तु शैलाभं हनूमन्तमवस्थितम् ।
महेन्द्र इव धाराभिः शरैरभिववर्ष ह ।। ६.५६.११ ।।।।

पूरा अध्याय