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वाल्मीकि रामायण 52.9

तद्वभूवाद्भुतं घोरं युद्धं वानररक्षसाम् ।
शिलाभिर्विविधाभिश्च बहुभिश्चैव पादपैः ।। ६.५२.९ ।।।।

पूरा अध्याय