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वाल्मीकि रामायण 52.7

शरनिर्भिन्नगात्रास्ते शूलनिर्भिन्नदेहिनः ।
जगृहुस्ते द्रुमांस्तत्र शिलाश्च हरियूथपाः ।। ६.५२.७ ।।।।

पूरा अध्याय