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वाल्मीकि रामायण 52.39

स तु पवनसुतो निहत्य शत्रुं क्षतजवहाः सरितश्च सन्निकीर्य ।
रिपुवधजनितश्रमो महात्मा मुदमगमत् कपिभिश्च पूज्यमानः ।। ६.५२.३९ ।।

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