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वाल्मीकि रामायण 52.28

आपतन्तीं शिलां दृष्ट्वा गदामुद्यम्य सम्भ्रमात् ।
रथादाप्लुत्य वेगेन वसुधायां व्यतिष्ठत ।। ६.५२.२८ ।।।।

पूरा अध्याय