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वाल्मीकि रामायण 52.21

केचिद्विनिहताः शूलै रुधिरार्द्रा वनौकसः ।
केचिद्विद्राविता नष्टाः सबलै राक्षसैर्युधि ।। ६.५२.२१ ।।।।

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