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वाल्मीकि रामायण 52.13

गजेन्द्रैः पर्वताकारैः पर्वताग्रैर्वनौकसाम् ।
मथितैर्वाजिभिः कीर्णं सारोहैर्वसुधातलम् ।। ६.५२.१३ ।।।।

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