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वाल्मीकि रामायण 47.8

यदाश्रयादवष्टब्धा नेयं मामुपतिष्ठति ।
सो ऽस्या भर्त्ता सह भ्रात्रा निरस्तो रणमूर्धनि ।। ६.४७.८ ।।।।

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