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वाल्मीकि रामायण 47.7

हताविन्द्रजिता ऽ ऽख्यात वैदेह्या रामलक्ष्मणौ ।
पुष्पकं च समारोप्य दर्शयध्वं हतौ रणे ।। ६.४७.७ ।।।।

पूरा अध्याय