Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 47.22

भर्तारमनवद्याङ्गी लक्ष्मणं चासितेक्षणा ।
प्रेक्ष्य पांसुषु वेष्टन्तौ रुरोद जनकात्मजा ।। ६.४७.२२ ।।।।

पूरा अध्याय