Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 44.5

कालाः काञ्चनसन्नाहास्तस्मिंस्तमसि राक्षसाः ।
सम्प्रादृश्यन्त शैलेन्द्रा दीप्तौषधिवना इव ।। ६.४४.५ ।।।।

पूरा अध्याय