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वाल्मीकि रामायण 42.8

अत्र सा मृगशावाक्षी मत्कृते जनकात्मजा ।
पीड्यते शोकसन्तप्ता कृशा स्थण्डिलशायिनी ।। ६.४२.८ ।।।।

पूरा अध्याय