ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 4242.5वाल्मीकि रामायण 42.5स चिन्तयित्वा सुचिरं धैर्यमालम्ब्य रावणः । राघवं हरियूथांश्च ददर्शायतलोचनः ।। ६.४२.५ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय