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वाल्मीकि रामायण 41.66

अराक्षसमिमं लोकं कर्तास्मि निशितैः शरैः ।
न चेच्छरणमभ्येषि मामुपादाय मैथिलीम् ।। ६.४१.६६ ।।।।

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